How to start Datacenter or Domain and hosting business ?
Top Digital Marketing Companies
Top Flutter App Development Companies
How to earn money Online ?
How to start Ecommerce business ?
इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
BBDS App Download
× Bindass Bol Home About News Contact Search

गुजरात में कैसे टूटा गंभीरा पुल, 2021 से होती रही दुर्घटनाएं, नहीं चेती सरकार

गुजरात गंभीरा पुल हादसा

गुजरात गंभीरा पुल हादसा

गुजरात में एक बार फिर पुल गिरने का बड़ा मामला देखने को मिला. इस बार वडोदरा के पादरा और आणंद जिलों को जोड़ने वाला महिसागर नदी पर बना 45 साल पुराना गंभीरा पुल ढह गया. इसकी वजह पुल का लंबे समय से जर्जर हालत में होना बताया जा रहा है. गुजरात में 2021 के बाद पुल ढहने की सातवीं घटना है. साल 2022 में मोरबी सस्पेंशन ब्रिज भी गिर गया था, जिसमें 135 लोग मारे गए थे.

आर एंड बी ने 3 साल पहले जारी की थी चेतावनी 

तीन साल पहले गुजरात के सड़क एवं भवन (आर एंड बी) विभाग के वडोदरा संभाग के अधिकारियों ने इस पुलिस को लेकर चेतावनी जारी की थी. इस पुलिस के पुननिर्माण का सुझाव दिया था. यानी विभागीय अधिकारियों ने सरकार को बहुत पहले सेचत कर दिया था. विभागीय लापरवाही की वजह से 45 साल पुराना यह पुल ढह गया, जिसमें 15 लोगों की मौतें हुई है. 

इस घटना को लेकर गुजरात के मुजपुर से वडोदरा जिला पंचायत सदस्य हर्षदसिंह परमार ने 4 अगस्त, 2022 को स्थानीय अधिकारियों को इस बारे में पत्र लिखा था. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, "हमारी चेतावनियों के बावजूद आर एंड बी विभाग ने इस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं की."

अधीक्षण अभियंता का दावा क्या है?

जिला कलेक्टर के अतिरिक्त चिटनिस (राजस्व अधिकारी) के अनुसार हर्षद सिंह परमार के पत्र को आर एंड बी विभाग के तत्कालीन कार्यकारी अभियंता को भेजा गया था. संपर्क करने पर वर्तमान कार्यकारी अभियंता नैनीश नायकवाला ने कहा, "पुल की हमारी (निरीक्षण) रिपोर्ट में किसी बड़े नुकसान का संकेत नहीं था. यह जर्जर नहीं था. बेयरिंग कोट क्षतिग्रस्त था और तदनुसार पिछले साल मरम्मत की गई थी."

मार्च 2022 में मोरबी पुल ढहने पर गुजरात उच्च न्यायालय में स्वतः संज्ञान वाली एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया था कि उसने नगर पालिकाओं और नगर निगमों में पुलों के निरीक्षण और रखरखाव के लिए एक नीति तैयार की है. चार महीने बाद राज्य सरकार ने आरएंडबी विभाग के सचिव को हटा दिया और अधिकारियों ने कहा कि नवनिर्मित पुलों में घटिया काम की कई रिपोर्टों के बाद मुख्यमंत्री ने यह कदम उठाया था.

गुजरात में 2121 के बाद पुल ढहने की घटनाएं 

23 अक्टूबर, 2023: बनासकांठा जिले के पालनपुर में एनएच 58 पर एक निर्माणाधीन पुल के गर्डर गिरने से दो लोगों की दबकर मौत हुई थी.

28 जून, 2023: सीएम भूपेंद्र पटेल द्वारा पुल उद्घाटन के मात्र 42 दिन बाद सूरत में तापी नदी पर बने वरियाव पुल में पहली बारिश के बाद दरारें आ गईं. सूरत नगर आयुक्त ने पुल प्रकोष्ठ के तकनीकी सहायक को निलंबित कर दिया और पर्यवेक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया. 

15 जून, 2023: वलसाड में एक रेलवे ओवरब्रिज, जिसका अभी उद्घाटन नहीं हुआ था, के कुछ हिस्सों से कंक्रीट के टुकड़े गिर गए. 

14 जून, 2023: तापी ज़िले में मिंधोला नदी पर बने एक नए 100 मीटर लंबे पुल का मध्य भाग ढह गया था. 

30 अक्टूबर, 2022: मोरबी में मच्छू नदी पर 1887 में बना सस्पेंशन ब्रिज मरम्मत के लिए सात महीने बंद रहने के बाद दोबारा खुलने के चार दिन बाद ही ढह गया. कम से कम 135 लोग मारे गए थे.

21 दिसंबर, 2021: अहमदाबाद के दक्षिण भोपाल के मुमतपुरा में एक फ्लाईओवर ब्रिज का एक हिस्सा स्ट्रेस टेस्ट के दौरान एक स्लैब के गिर जाने से ढह गया था. 


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Dhirendra Mishra

11 Jul 2025  ·  Published: 00:40 IST

डिजिटल इवेंट्स में उलझा HEC, पाकिस्तान की शिक्षा व्यवस्था पर गहराया संकट

(फाइल फोटो)

(फाइल फोटो)

Pakistan Education System Collapse: पाकिस्तान में उच्च शिक्षा को सुधारने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी जिस संस्था पर थी, वही संस्था आज अपने असल मकसद से भटकती नजर आ रही है. 'द न्यूज इंटरनेशनल' की एक रिपोर्ट ने पाकिस्तान के उच्च शिक्षा आयोग (HEC) की गंभीर कमियों और दिशा हीनता को उजागर करते हुए बताया है कि कैसे यह संस्था शिक्षा सुधार के बजाय "चमक-दमक वाले आयोजनों" और सतही कार्यक्रमों में उलझ गई है.

रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षा आयोग अब इंटर्नशिप कार्यक्रम, लैपटॉप वितरण, करियर प्लानिंग वर्कशॉप, संचार कौशल ट्रेनिंग और सीवी-इंटरव्यू की तैयारी जैसे कार्यों में उलझ गया है, जो कि वास्तव में विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी होती है. हाल ही में 'पाकिस्तान डिजिटल लीप' कार्यक्रम में एचईसी अध्यक्ष के होलोग्राम का अनावरण इस दिशा भटकाव का एक प्रतीक बन गया.

रिपोर्ट यह भी कहती है कि नियामक संस्था का काम मानक तय करना और प्रदर्शन संकेतकों (KPI) को निर्धारित करना है, न कि खुद इन कार्यक्रमों को संचालित करना. 200 से अधिक विश्वविद्यालय लैब्स अपनी जरूरतों के अनुसार नवाचार कर सकते हैं, लेकिन एचईसी हर जगह दखल दे रहा है.

HEC के अध्यक्ष पर यह आरोप है कि वे मुख्य रूप से संघीय शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण मंत्रालय के अधिकारियों को संतुष्ट करने में लगे रहते हैं. इससे न केवल संस्थान की स्वायत्तता प्रभावित होती है, बल्कि दीर्घकालिक सुधार योजनाएं भी अधर में लटकी रह जाती हैं.

हालांकि सरकारें उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती रही हैं, लेकिन 2017 के बाद से HEC के बजट में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है. वहीं, मंत्रालय का नियंत्रण बढ़ जाने से नौकरशाही हावी हो गई है, जिनके पास उच्च शिक्षा का कोई विशेष अनुभव नहीं है.

रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि उच्च शिक्षा से जुड़े मूल मुद्दे, जैसे बजट, गुणवत्ता, पहुंच और अनुसंधान पर फोकस न होकर, एचईसी ऐसे कार्यक्रमों में उलझ गया है जिनका दीर्घकालिक लाभ संदिग्ध है. अधिकारियों की प्राथमिकता दो-तीन साल के कार्यकाल में 'त्वरित परिणाम' और 'प्रभावशाली इवेंट' दिखाना बन गया है.

रिपोर्ट ने सलाह दी है कि HEC को अपनी मूल जिम्मेदारियों शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्र हित में नीतियां बनाने पर तुरंत ध्यान केंद्रित करना चाहिए. इसके लिए अध्यक्षों और कुलपतियों को अधिक स्वायत्तता, समय और योजना की स्पष्टता दी जानी चाहिए. गैर-जरूरी पहलों को अन्य विभागों को सौंप देना चाहिए ताकि HEC फिर से एक प्रभावशाली नियामक संस्था बन सके.

एक ऐसा संस्थान जो पाकिस्तान की नई पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का ध्येय रखता था, आज 'दिखावे की दौड़' में उलझकर अपने उद्देश्य से भटक चुका है. अगर समय रहते सुधार नहीं हुए, तो पाकिस्तान की उच्च शिक्षा प्रणाली और गहरे संकट में जा सकती है.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Raihan

06 Aug 2025  ·  Published: 19:38 IST

Delhi Cash Scandal: जांच समिति ने जस्टिस वर्मा की सफाई को किया खारिज, पूछा- शिकायत क्यों नहीं कराई दर्ज?

जस्टिस यशवंत वर्मा

जस्टिस यशवंत वर्मा

Delhi Cash Scandal News: देश की राजधानी दिल्ली में जस्टिस यशवंत वर्मा के तत्कालीन सरकारी आवास से करोड़ों में जले नोट बरामद किए जाने के मामले की जांच कर रही सुप्रीम कोर्ट की समिति ने अपनी रिपोर्ट में उनकी साजिश की ‘थ्योरी’ को खारिज कर दिया है. समिति ने जस्टिस वर्मा से पूछा है कि आपके खिलाफ पुलिस में शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई?

जस्टिस यशवंत वर्मा के मुताबिक जिस भंडार रूम से कैश की बरामदगी हुई थी, उसका इस्तेमाल अप्रयुक्त फर्नीचर, बोतलें, कालीन और लोक निर्माण विभाग की सामग्री सहित विविध वस्तुओं को रखने के लिए किया जाता था. संपत्ति के सामने तथा पीछे दोनों प्रवेश द्वारों से पहुंचा जा सकता था, जिससे बाहरी लोगों के लिए वहां पहुंचना आसान हो जाता था.

जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की सिफारिश

पंजाब एवं हरियाणा उच्च के चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में कहा कि जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों का भंडार कक्ष पर ‘‘गुप्त या सक्रिय नियंत्रण’’ था. समिति की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि यह साबित करता है कि उनका कदाचार इतना गंभीर था कि उन्हें हटाया जाना चाहिए.

कैश कांड साजिश थी तो चुप क्यों रहें जस्टिस वर्मा?

सुप्रीम कोर्ट की समिति ने कहा, "जस्टिस यशवंत वर्मा के असाधारण आचरण पर पहले ही गौर किया जा चुका है. अगर कोई साजिश की बात थी तो उन्होंने पुलिस अधिकारियों के पास कोई शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई या हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या भारत के प्रधान न्यायाधीश के संज्ञान में क्यों नहीं लाया कि उनके घर के भंडार कक्ष में करेंसी नोटों के जलने के बारे में ‘प्लांटेड खबर’ बनाई गई थीं.’’

समिति की रिपोर्ट में आगे कहा गया है, ‘‘जस्टिस वर्मा या उनके परिवार के सदस्यों या किसी अन्य गवाह की ओर से कोई उचित स्पष्टीकरण न मिलने के कारण, इस समिति के पास यह मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है कि स्टोर रूम में करेंसी नोटों के ढेर जैसी अत्यधिक संदिग्ध सामग्री रखने की अनुमति देकर उन्होंने उन पर जो भरोसा जताया था, उसे झुठलाया है.’’


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Chia

19 Jun 2025  ·  Published: 18:50 IST

Bihar Chunav 2025: NDA बनाम महागठबंधन - रोजगार और महिला सशक्तिकरण में बराबरी, एजुकेशन-हेल्थ में बड़ा फर्क

तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार

तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार

बिहार की सियासत अब घोषणापत्र की लड़ाई में उतर चुकी है. एनडीए और महागठबंधन, दोनों ने जनता के सामने अपनी विकास-दृष्टि पेश की है. रोजगार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर दोनों गठबंधन समान रूप से सक्रिय दिखे, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग के क्षेत्र में उनकी प्राथमिकताएं अलग-अलग नजर आती हैं. सवाल यह है कि बिहार की जनता किस मॉडल पर भरोसा करेगी - एनडीए के ‘विकसित बिहार’ के एजेंडे पर या महागठबंधन के ‘न्याय-विकास’ के विज़न पर?

NDA के मजबूत पहलू

1. रोजगार लक्ष्य: एनडीए ने 1 करोड़ नौकरियों का वादा किया है. 
2. विशेष वर्गों को केंद्रित: महिलाओं, दलितों, अति-पिछड़ों को आर्थिक-सहायता का वादा भी एनडीए के घोषणा पत्र में शामिल है. 
3. इन्फ्रास्ट्रक्चर और औद्योगीकरण पर जोर: राज्य में बड़े निवेश, एक्सप्रेसवे, रेल आधुनिकीकरण का वादा, बाढ़ मुक्त बिहार, फ्री एजुकेशन और चिकित्सा सुविधा.
4. योजनाओं पर अमल पर बल: कौशल-विकास केन्द्र, जिले-स्तर पर मेगा स्किल सेंटर आदि का प्रावधान. 
5. दीर्घावधि विकास का मिशन-सेट:  'विकसित बिहार' जैसे विजन के साथ योजनाओं विकास का वादा. 

Mahagathbandhan के सकारात्मक पहलू

1. हर-घर सरकारी नौकरी का वादा: प्रत्येक परिवार में एक सरकारी नौकरी देने का वादा. 
2. सामाजिक सुरक्षा : पुरानी पेंशन योजना बहाल करने के साथ्ज्ञ  महिलाओं-विधवाओं के लिए मासिक सहायता राशि की योजना पर अमल का वादा.
3. शिक्षा-प्रौद्योगिकी और सुधार पर जोर: छात्र-छात्राओं के लिए मुफ्त फॉर्म-एग्जाम फीस, टेबलेट, बड़े-स्तर की यूनिवर्सिटी-कॉलेज. 
4. न्याय-वितरण और सुधारात्मक दृष्टि: माइक्रो-फाइनेंस कंपनियों पर सख्ती, भूमि-मुक्का रहितों को जमीन देने का वादा.
5. राष्ट्रवाद-विकास को सामाजिक न्याय के साथ जोड़ने की कोशिश: घोषणापत्र में सामाजिक न्याय, अल्पसंख्यक-वर्ग, किसान-वर्ग के हितों पर फोकस किया गया. 

एनडीए vs महागठबंधन 

1. रोजगार का वादा: संख्या बनाम नीति

एनडीए ने 1 करोड़ नौकरियों का ठोस लक्ष्य तय किया है. रोजगार सृजन के मद्देनजर  निजी क्षेत्र और MSME पर फोकस किया जाएगा. जबकि महागठबंधन ने हर घर से एक सरकारी नौकरी देने का वादा किया है, लेकिन उस पर अमल कैसे होगा यह स्पष्ट नहीं है. 

2. विकास बनाम कल्याण

एनडीए के घोषणा पत्र में उद्योग, IT पार्क, सड़क और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने का रोडमैप दिया गया है. महागठबंधन ने सामाजिक सुरक्षा, पेंशन बहाली, महिलाओं को मासिक सहायता पर जोर दिया है. 

3. महिलाओं और युवाओं के लिए योजनाएं

एनडीए ने महिला सुरक्षा और स्वरोजगार योजना चलाने के लिए स्किल सेंटर और शिक्षा में  निवेश की वकालत की है. महागठबंधन के घोषणा पत्र में महिला सहायता राशि, छात्राओं को टैबलेट और मुफ्त फॉर्म-फीस का वादा.

4. किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

एनडीए ने कृषि-उद्योग, फूड प्रोसेसिंग और सिंचाई नेटवर्क के विस्तार पर ध्यान दिया है. वहीं महागठबंधन ने किसानों की कर्जमाफी और न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने का वादा किया है. 

5. विश्वसनीयता

एनडीए ने नीतियों के साथ रोडमैप भी पेश किया है. यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के वादों में शासन प्रशासन के अनुभव की झलक दिखाई देती है. दूसरी ओर महागठबंधन के वादों में भावनात्मक अपील ज्यादा है. वित्तीय योजनाओं की नीति साफ नहीं है. 

​बेहतर कौन? 

बड़ी योजनाओं पर अमल के लिहाज से देखें तो एनडीए का मेनिफेस्टो बेहतर दिखता है. क्योंकि उसमें रोजगार, निवेश, इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे ठोस वादे हैं, जिन्हें मापने-योग्य बनाया गया है.लेकिन यदि 'सामाजिक न्याय, समावेश-उपरांत सुधार, जोखिम-रहित वादे' देखें तो महागठबंधन का मेनिफेस्टो ज्यादा आकर्षक लगता है. खासकर उन लोगों के लिए जो पेंशन, शिक्षा-सुधार और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं. एनडीए का वादा अधिक व्यावहारिक और स्किल-आधारित दिखता है.

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर चुनाव प्रचार चरम पर है. अब दोनों प्रमुख गठबंधन का घोषणा पत्र भी सामने आ गए है. विधानसभा की 121 सीटों पर पहले चरण का चुनाव प्रचार अंतिम चरण में है. सभी दलों के नेता और प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर जोर आजमाइश में जुटे हैं. पहले चरण के लिए मतदान 6 नवंबर और दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा. 243 सीटों पर डाले गए मतों की गिनती 14 नवंबर को होना है. मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे. 


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Dhirendra Mishra

01 Nov 2025  ·  Published: 06:50 IST